कुंदन की बचपन की साथी
हर गलत और सही काम में बराबर की भागीदारी
कुंदन के हर गलती को सही साबित करने वाली
धीरे धीरे कुंदन पे ही मर मिटने लगी
उसने अपना हमसफ़र अपने ही घोसले के बगल के घोसले में खोजा
जबकि कुंदन घोसले से उड़ कर दूर शहर में जा के अपनी बेगम को पाना चाहा
जब ये चिड़िया बड़ी हुई तो इसने भी दूर की दुनिया देखी लेकिन इसका तन मन उसी कुंदन पे अड़ा था
कुंदन के हर काम में आज भी भागीदारी
उसके बाप के कपडे फाड़ने पर भी उसके गले से लिपटने को आज भी तैयार
और उसकी ईश्वर से सिर्फ एक ही मांग कुंदन के चंचल मन की शांति
कुंदन की जुबान से अपना नाम प्यार से सुनने को तड़पन थी उसकी
लेकिन फिर भी कुंदन की चाह में साथ देती
सिर्फ कुंदन के लिए
आखिर बचपन में अगर कुंदन शिव था तो
वो भी तो पार्वती थी
जानती थी की चाँद का दीदार तो नहीं हो सकेगा लेकिन तारो के सहारे से अँधेरा दूर करने की चाह थी
आखिर 15 सालो से सोलह सोमवार का व्रत जो रख रही थी
जो लड़की अभी अभी गौ माता से जोया की शादी किसी और से होने की भीख मांग रही थी
वो अचानक कुंदन के कहने पे उसी लड़की की शादी तुड़वाने के लिए अपनी इज्जत का ख्याल न करते हुए गंदे फोटोशूट करवाई
सिर्फ कुंदन की खुशी के लिए
इस फोटोशूट के पुरे नौटंकी में जितना कुंदन के करीब रह सकती थी उतना रही
कभी स्कूटर पे उसके कमर को पकडे हुए
तो कभी अस्पताल में अपनी झूटी नींद में उसके कंधो पे लेटे हुए
तो कभी झूठी इंजेक्शन की मार से बेहोश होने की नाटक कर कुंदन के बाहो में आने की चाह में
वो जानती थी की वो अपने प्यार को पा तो नहीं सकती
कम से कम इस जनम में तो नहीं
लेकिन प्यार को पाना ही प्यार नहीं है
प्यार को अमर रखना प्यार है
जो उसने किया |
( note-जोया वो लड़की थी जिससे कुंदन चाहता था )
( note-जोया वो लड़की थी जिससे कुंदन चाहता था )

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