मैंने सुना था की हर प्यार को सतर्कता की जरुरत होती है ताकि कोई उसका गलत इस्तेमाल न करे जैसे की हर गुलाब के साथ काटा होता है जो उसकी रक्षा करता है | लेकिन मेरे हिसाब से ऐसा नहीं है प्यार केवल प्यार ही बरसायेगा और हर लाभान्वित लोग उसका काटा बनके उसकी रक्षा करते है |
वैसे ही जब सीता रावण की लंका के जेल में थी तो भी उनके प्यार का असर ये था की जेल सुरक्षाकर्मी (महिलाये ) उनसे इतना ईर्ष्या करने लगी थी उन सबके पास भी राम को उन्हें सौपने के अलावा कोई चारा नजर नहीं आया |
ये थी सीता के प्यार की ताकत !
प्रेमसर
कह दो तुम अपने राम पिया से
जल्दी से वो आए रे
हम तो तेरी इस आंच से जल कर
टूट रहे है
है यहां पे इतनी दौलत
हम सबको है इतनी रौनक
पर नाचे तू और गाए तू
हम सब की है अतरंगीया
पर सांचे तू
हो गई है कुरूपा तू इतनी
पर सवारें तू
देख हमारे मुखड़े को
अप्सरा भी शर्माए रे
लेकिन है हम प्यासे
उनकी (पति ) माया के
और मोहे तु
सोच के हम डरे की राम तेरे को वापस चाहेंगे ?
तेरे डर से हम भय गए
पिया हमरी अब सताए रेे
कैसे तुझे है इतनी वफा उनपे
देख तुझे राम से भी वफा होए रे
कह दो अपने राम पिया से
जल्दी से तुझे ले जाए रे ।

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