Sunday, 31 December 2017

स्पर्श




समंदर से भी गहरे ख्वाबो को ले के तन्मय निकल पड़ा था शहरो की ओर | इसके पहले कोई नहीं  थी उसकी जिंदगी में | उसके ऊप्पर बस मम्मी पापा का साया था और वही लोग उसकी दुनिया | रोज की हर छोटी से छोटी चीज वो अपनी मम्मी से शेयर करता | पता है मम्मी आज ये हुआ ,आज वो हुआ |
और इसी बक बक के साथ रात होती और खूबसूरत नींद में चला जाता | आज तक हर नींद उससे अच्छी लगती थी क्योकि नींद में कोई खास ख्वाब नहीं थे बस सुकून था |
सुबह जल्दी भी उठता था क्योकि उसे रेस जो लगानी थी अपने दोस्तों से की देख मैं जल्दी उठा या फिर जल्दी क्लास में आ गया या फिर मेरी साइकिल तुझसे पहले खड़ी है वगैरह वगैरह |
अब उसे कॉलेज में एडमिशन लेना था | उसे अब अपनी छोटी दुनिया से बड़ी दुनिया में सामना करना था |
खैर अब वो कॉलेज आ चूका था | हॉस्टल में उसने भी दोस्त बनाये | नए दोस्तों का साथ अच्छा लगा क्योकि वो था ही चंचल | यहाँ तो उसे पूरी छूट थी की हर तरफ से | यहाँ कोई कम्पटीशन नहीं था |

कॉलेज लाइफ का अभी 5 -6 महीने ही बीते थे की उसकी दोस्ती उसके ही कॉलेज की एक सीनियर लड़की से हुई | नाम था प्रिया |
प्रिया एक बहुत ही शर्मीली और श्यामल रंग की खूबसूरत लड़की थी | उसकी हाइट तन्मय से ज्यादा थी |

अब प्रिया की कहानी

प्रिया भी एक छोटी बस्ती से आयी हुई लड़की थी |आते ही उसकी दोस्ती मनीष नाम के लड़के से हुई |
 मनीष एक कद काठी से लम्बा और गठीलेदार था | बाद में वैलेंटाइन के दिन मनीष ने प्रिया को प्रोपोज़ किया था और प्रिया खुशी खुशी राजी हो गई थी | इस इजहार के बाद मनीष प्रिया के बहुत सारा हक़ खुद का हक़ समझने लगा था |
वो जब मन प्रिया को हाथ लगाता लेकिन प्रिया खुश थी पर कभी कभी वो इस चीज इरिटेट से हो जाती थी |
उसने इसके बारे में मनीष से कहा था लेकिन वो इस बात को हमेशा से हलके में लेता था |
मनीष की इस मंचलापन से बहुत निराश थी वो |
एक दिन मनीष की जबरदस्ती से परेशान होकर उसने उसके साथ ब्रेकअप कर लिया |

प्रिया और तन्मय अब काफी अच्छे दोस्त हो चुके थे | बिना शर्त तन्मय प्रिया की हर तरह से सहायता करता था |
प्रिया को अब मनीष की याद नहीं सताती थी लेकिन उसका छूना ( याद )अब भी निराश करता था |

एक दिन मनीष ने तन्मय से कहा की प्रिया बस तेरी दोस्त है उसे अगर तू छूने भी जायेगा तो वो बहुत नाराज हो जाएगी |
मनीष ने जानकारी प्रिया के बारे में सही दी थी |
लेकिन तन्मय ने उसे नजरअंदाज करके प्रिया को अपनी तरफ से जानना चाहा |
प्रिया के लिए तन्मय का त्याग न चाहते हुए भी सबको दिख रहा था |
एक दिन प्रिया तन्मय के फ्लैट पे आयी थी | आज प्रिया का बर्थडे जो था |
पार्टी हुई सब एन्जॉय किये और रात के 2 बजे पार्टी ख़त्म हो गई |
सब चले गए प्रिया नहीं गई |
प्रिया और तन्मय बैठ कर एक खुशनुमा और एक प्यार भरी इमोशन की बातो में डूबे हुए थे |
तन्मय ने धीरे धीरे प्रिया के हाथो के उप्पर अपना हाथ रख दिया |
प्रिया ने पहले तो तन्मय को देखा लेकिन आज प्रिया के चेहरे का भाव बदल गया |
आज उसके हाथो पे जो हाथ था उसका एहसास बिलकुल अलग था |
आज वो बिलकुल डरी हुई नहीं थी | आज जबकि वो एकदम निर्भीक महसूस कर रही थी |
आज उसको उस छुअन से कोई दिक्कत नहीं थी | आज रात उन्होंने अपने प्यार का इजहार और इकरार दोनों कर लिया |
आगे भी प्रिया को इस फिजिकल रिलेशन से कोई दिक्कत नहीं हुई ,कभी उसे डर भी नहीं लगा |

एहसासों की ताकत थी ये |
हर छुअन की भी भाषा होती है | हमारा स्पर्श हमारे मन और दिल की चाहत की सच्चाई  को बयां कर देते है |


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